एन्टी रेप लॉ बिल संसद में पास
लो
भईया अब एन्टी रेप लॉ बिल पास हो गया है। किसी भी महिला को घूरने पर, उसका पीछा
करने पर ग़ैर ज़मानती वॉरन्ट निकल जायेगा। और इन सभी केसों में लड़की का बयान
आख़िरी होगा।
तो सिर्फ़ घूरने पर ही क्यों देखने पर भी नियम
बना दो, ग़लती से आँख मार दी तो उस पर भी वॉरन्ट निकाल दो। विडियोग्राफ़ी करने पर
तो वॉरन्ट निकलेगा ही तस्वीर खींचने पर भी वॉरन्ट निकाल दो और अगर तस्वीर लड़की के
मन मुताबिक़ ना आई हो तो उम्र क़ैद की सज़ा सुना दो।
बस,
ट्रेन, मेट्रो आदि में सफ़र करते हुए अगर किसी महिला को धक्का लग जाए तो उसपर भी वॉरन्ट
निकलना चाहिये। ग़लती से भी आप महिला आरक्षित सीट पर बैठ गये तब तो यह एक गुनाह है
इस पर तो ग़ैर ज़मानती वॉरन्ट निकलना चाहिये।
आज कल
तो सोशल नेटवर्किंग साइट का ज़माना है तो इसे कैसे छोड़ सकते हैं। इस पर भी नकेल
कस दी जाए। अन्जान लड़की को फ़ेसबुक पर फ़्रेन्ड रिक्वेस्ट भेजने पर भी वॉरन्ट
निकलना चाहिये। लड़की के अपडेट्स पर लाइक और अच्छी कमेंट ना करने पर तो उम्रकैद हो
जानी चाहिये। बिना पूछे टैग करने पर भी वॉरन्ट निकलना चाहिये। ना जाने किस टैग को
लेकर लड़की की भावनाओं को ठेस पहुँच जाए।
लड़की
पर ग़ुस्सा दिखाने पर भी कानून बनना चाहिये और ग़ुस्सा किस लेवल तक का मान्य होगा
इसका भी कानून बनना चाहिये और अगर यह बिल्कुल अमान्य है तो इस पर भी कानून होना
चाहिये और वॉरन्ट तो ज़रूर निकलना चाहिये।
अब
ग़लती से भी अगर कोई लड़की आपके आगे चलती है श्रीमान तो आपके नाम का ग़ैर ज़मानती
वॉरन्ट निकल जायेगा तो कभी भी किसी लड़की के पीछे ना चलें हाँ आगे चलते हुए पीछे
मुड़कर देखने पर क्या होगा इस पर अब तक कोई कानून नहीं बना लेकिन इसपर भी कानून
बनाना चाहिये और वॉरन्ट तो ज़रूर निकलना चाहिये। अगर बराबर में चलते हैं तो ? मेरे ख़याल से इस पर भी
कानून बनाकर वॉरन्ट निकाल देना चाहिये। अब तो सीढ़ियाँ चढ़ते और उतरते वक्त भी
ख़ासा ध्यान देना होगा ग़लती से भी अगर कोई लड़की आगे हुई तो एन्टी रेप लॉ के तहत पीछा
करने की शिकायत दर्ज करा कर ग़ैर ज़मानती वॉरन्ट ना निकलवा दे। इस कानून पर थ्री
इडियट्स फ़िल्म का एक डायलॉग याद आता है जिसे अब बदलकर कुछ यूँ कहना चाहिये “लाइफ़ इज ए रेस अगर तुम
आगे नहीं चलोगे और कोई लड़की तुमसे आगे निकल गयी तो तुम्हारे नाम का ग़ैर जमानती
वॉरन्ट निकल जायेगा।”
अगर
आप लेडीज़ फ़स्ट के जुमले को नहीं अपनाते तब तो वॉरन्ट ज़रूर निकलना चाहिये और वो
भी ग़ैर ज़मानती। इसमें लड़की को आगे ना आने देने का केस बनना चाहिये और सख़्त से
सख़्त सज़ा का प्रावधान होना चाहिये और अगर उम्र क़ैद हो जाए तो क्या कहने। लड़की
को कहीं बाहर ले जाने या कॉफी पीने के प्रस्ताव को भी गम्भीरता से लिया जाना
चाहिये और अगर लड़की प्रस्ताव ठुकराती है तो ग़ैर ज़मानती वॉरन्ट निकलना चाहिये।
आख़िर
आपने लड़की को इगनॉर करने या चेप होने की हिमाकत की कैसे? इसलिये लड़की को देखकर मुस्कराने, कॉम्प्लिमेंट
देने और कॉम्प्लिमेंट ना देने पर भी वॉरन्ट निकलना चाहिये और इस बाबत सज़ा क्या हो
ये लड़की ख़ुद तय करे मगर सज़ा सख़्त ज़रूर होनी चाहिये। अब तो मज़ाक भी बचकर करना होगा कहीं
लड़की उस मज़ाक को छींटाकशी का नाम देकर वॉरन्ट ना निकलवा दे।
फ़न्डा
तो बस ये है कि ये जितने भी कानून बन रहे हैं यह तो सिर्फ़ पुलिस को घूस बटोरने के
लिये नये रास्ते बनाये जा रहे हैं और कुछ नहीं। आख़िर घूरने और पीछा करने को आप
कैसे माँपेंगे ज़रा बताइये। अगर किसी महिला को देखकर मुझे मेरी किसी जान पहचान
वाले से मिलती जुलती शक़्ल लगे और मैं उसके चेहरे को देखते हुए याद करने की कोशिश
करूँ तो ? यह
तो घूरने की श्रेणी में आ जायेगा। इन चीज़ों को साबित करना मुश़्किल ही नहीं नामुमकिन
होगा।
P.S. : ऊपर लिखे गये विचार मैंने केवल इस कानून की कमज़ोरियाँ
दिखाने हेतु लिखे हैं। मेरा मक़सद किसी को भी ठेस पहुँचाना नहीं है और ना ही किसी
महिला से मेरी दुश्मनी या बैर है..धन्यवाद!
~ image courtesy google

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