दबंग 2: सलमान की नयी फ़िल्म
उनकी पुरानी दबंग का सिक्वल है पर इसमें भी दबंग जैसा ही मसाला है। एक्शन से भरपूर
इस फ़िल्म में रोमांस और कॉमेडी का तड़का भी भरपूर है। चुलबुल पाण्डे अपने चिर
परिचित अंदाज़ में गुण्डों को पीटते हैं और फिर अपनी बकैती से दर्शकों को हँसाते
भी हैं। फ़िल्म में जो एक बात देखने लायक रही वो था पाण्डे परिवार का पारिवारिक
सौहार्द जो कि पिछली दबंग से नदारद था। निर्देशक की कुर्सी सम्भालने के बाद अरबाज़
ने ये एक अच्छी बात फ़िल्म में दिखाई शायद इसकी वजह उनकी ख़ुद की सुखद पारिवारिक
ज़िंदगी है। ख़ासकर फ़िल्म का वो सीन जहाँ चुलबुल यह कहते हुए ख़ुश होता है कि
सपने में उसने अपने पिता जी को अपने दादा जी से मार खाने से बचा लिया तब प्रजापति
पाण्डे (विनोद खन्ना) कहते हैं कि “मेरा तो एक ही सपना था कि तू मुझे इज़्ज़त दे और तू अब
मुझे सपने में भी इज़्ज़त देने लगा है”। पिता-पुत्र के प्रेम को अरबाज़ ने बड़े ही ख़ुबसूरत
तरीके से दिखाया है। बाकी सब तो नयी दबंग में बिल्कुल पुरानी दबंग जैसा ही है।
छेदी सिंह की तरह इस बार भईया सिंह (प्रकाश राज) का आतंक है । भईया के एक भाई हैं
चुन्नी (निकितन धीर जो कि आज कल सलमान की सभी फिल्मों में दिखते हैं)। चुन्नी ने
सलमान को फ़ाइट सीनों में कड़ी टक्कर दी है ख़ासकर तब जब दोनों शर्ट उतार कर द्वंद
युद्ध करते हैं । नयी दबंग में कोई ‘कन्फ्यूज़ कर देने वाला’ डॉयलॉग भी नहीं है जो याद रहे या दिमाग़ मे बस जाये। फ़िल्म के
गाने कुछ ख़ास असर नहीं छोड़ते हैं जहाँ पिछली दबंग में सारे ही गाने बेहतरीन थे
वहीं नयी दबंग में ‘दग़ाबाज़ रे’ के अलावा और कोई गाना दमदार नहीं है, करीना का आइटम
सांग ‘फ़ेविकॉल’ ठीक-ठाक सा है पर उसमें
‘मुन्नी’ वाली बात नहीं जिससे ये
‘बदनाम’ हो सके! सपोर्टिग रोल में दीपक
डोबरियाल (गेंडा सिंह) ने भी अच्छा अभिनय किया है । कुल मिलाकर नयी दबंग में कुछ
भी नया नहीं है।
P.S. : अक्ल के आने के लिये शक़्ल के बिगड़ने का इंतज़ार क्यों
कर रहे थे तुम ~ सलमान ख़ान पंकज त्रिपाठी से
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