धूम 3
धूम 3: बदला..बदला इंसान से कुछ भी करा सकता है..बदला लेने के लिए इंसान
कुछ भी कर सकता है..किसी भी हद तक जा सकता है..बदला लेते वक़्त वो ये तक नहीं सोचता
कि वो सही कर रहा है या ग़लत..ये बस एक जुनून होता है जो सर पर सवार हो जाए तो बंदा
कुछ भी कर गुज़रता है। क्यूँकि बदले की आग होती ही क़ातिल है।
विजय
कृष्ण आचार्य की धूम 3 भी बदले की आग में जलने वाले एक शख़्स- साहिर (आमिर ख़ान) की
कहानी है। लोन ना चुका पाने के कारण बैंक उसके बाबा (जैकी श्रॉफ़) का ‘दि ग्रेट इंडियन सर्कस’ बंद कर देता है जो साहिर के बाबा की मौत का कारण
बनती है और साहिर के बदले की वजह भी। फिर साहिर बैंक को बर्बाद करके उसे बंद करने की
ठान लेता है। बैंक बंद कराना उसकी ज़िंदगी का एक अकेला मक़्सद बन जाता है। फिर शुरू होता है चोर और पुलिस का खेल और इस खेल में इंस्पेक्टर
जय दीक्षित (अभिषेक बच्चन) साहिर के पीछे हाथ धो कर पड़ जाता है। मगर साहिर भी मंझा हुआ खिलाड़ी है क्यूँकि उसके
पास एक तुरुप का इक्का है समर। समर ही फ़िल्म का और साहिर का सबसे बड़ा राज़ है, और
इसी वजह से जय साहिर को पकड़ने में नाकाम भी होता है। पर जय तो इंडिया का सुपर कॉप
है तो वो आख़िरकार साहिर का ये राज़ जान जाता है और उसको पकड़ भी लेता है।
विजय
कृष्ण आचार्य ने धूम की कहानी लिखी थी और धूम 2 का स्क्रीनप्ले लिखा था। धूम 3 में
कहानी के साथ निर्देशन भी उनका ही है मगर वो धूम सीरीज की पिछली फ़िल्मों की तरह इस
फ़िल्म में धूम नहीं मचा पाए। फर्स्ट हाफ़ में तो आमिर सिर्फ भागते हुए ही नज़र आए।
इन्टरवल के बाद फ़िल्म थोड़ी ठीक हुई मगर तब तक काफ़ी देर हो चुकी थी। जो बात सबसे
ज़्यादा खली वो ये कि फ़िल्म में एक भी चोरी नहीं दिखाई गई जैसा कि दर्शक उम्मीद कर
रहे थे। आमिर सिर्फ चोरी करने के बाद भागते हुए ही नज़र आए। फ़िल्म में कुछ ख़ास स्टंट
सीन भी नहीं दिखे। गानों की बेकार टाइमिंग, बेदम कहानी और प्रीतम का कमज़ोर संगीत फ़िल्म
को और बोरिंग बनाते हैं। 7 साल के लंबे इंतज़ार के बाद आई धूम 3 में धूम मचाने जैसा
कुछ भी नहीं था। उम्मीद थी कि आमिर पिछले चोर रितिक से एक कदम आगे जाएंगे पर आमिर रितिक
को छू भी नहीं पाए। फ़िल्म में सुदीप भट्टाचार्य का कैमरा शानदार है। बीएमडबल्यू की
बाइक जो आमिर ने चलाई है वो फ़िल्म में आकर्षण का केंद्र है।
फ़िल्म
में आमिर ही छाए हुए हैं। कटरीना ने फ़िल्म में ग्लैमर का तड़का लगाया है। पुलिस के
रोल में अभिषेक बच्चन और उदय चोपड़ा ने कुछ नया नहीं किया है। मिस्टर पर्फ़ेक्शनिस्ट
कहे जाने वाले आमिर ख़ान ने कैसे फ़िल्म के लिए हाँ कह दी पता नहीं।
फ़िल्म
देखते हुए अगर मुझे जम्हाई आ जाए तो समझ आ जाता है कि फ़िल्म बोरिंग है। धूम और धूम
2 देखते वक़्त मैं सीट से बिना हिले फ़िल्म देखता रहा वहीं धूम 3 देखते हुए मुझे दो
बार जम्हाई आई। अगर आप आमिर के बहुत बड़े फैन है तो फ़िल्म आपके लिए ही बनी है वर्ना
मैक्स पर धूम की पुरानी फ़िल्में देख लें!
P.S. : बन्दे हैं हम उसके हमपे
किसका ज़ोर, उम्मीदों के सूरज निकले चारों ओर, इरादे हैं फ़ौलादी हिम्मती हर कदम, अपने
हाथों किस्मत लिखने आज चले हैं हम..

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